Sunday, 11 April 2021

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार हंसीतनाव कम करने में सहायक होती है साथी है दिमाग की क्षमता बढाती है और शरीर को स्वस्थ रखती है । इसीलिए हंसीको एक अच्छी दवा बतायी गयी है । जोक्स सुनाना या सुनना का महत्व इसलिए भी बढ जाता है, आजकल जहाँ लोग सिमटते जा रहे हैं, आपस में बातचित कम होती है, वहीं जोक्स सुनाकर एक दूसरे का मन बहलाया जा सकता है, एक दूसरे के करीब आया जा सकता है । यहाँ हम कुछ  Hindi Jokes Book का परिचय दे रहें, जिसे पढकर आप स्वंय तथा दूसरों को गुदगुदा सकते हैं,   आज के तनाव भरी जिंदगी में थोड़ी सी राहत पा सकते हैं ।    Chutkule book hindi

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संता टुरिस्ट दिल्ली गये । घंटाघर के पास उन्हें लगातार घड़ी की ओर निहारता देख एक व्यक्ति ने उन्हें प्रस्ताव दिया, “ आप यह घड़ी खरीद सकते हैं, लाइए हजार रुपए ।" 

संता टुरिस्ट प्रसन्न हुए और फौरन हजार रुपए निकाल कर दे दिए । वह व्यक्ति “ अभी सीढी लाता हूँ ”  कहकर गायब हो गया । काफी देर इंतजार करने के बाद संता को आभास हुआ कि वह ठगे गए । निराश होकर वह होटल चले गए । अगले दिन उसी जगह फिर से घड़ी देखते हुए वही व्यक्ति उन्हें मिल गया और उसने फिर से वही प्रस्ताव दिया ।

संता इसबार सतर्क थे, बोले, और तो सब ठीक है लेकिन इस बार सीढी लेने मैं जाऊँगा ।   


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एक दिन डब्बूजी केक खरीदने बाजार गये । मुश्किल से उन्होंने एक केक पसंद किया । बेकरी का कर्मचारी बोला, “ हाँ तो डब्बूजी, आप केक कटा हुआ चाहेंगे या पूरा ?”

“ कटा हुआ ।“ ढब्बू जी ने कहा ।

“ कितने टुकड़े करूँ ? चार या आठ ?”

“ चार ही करो जी, आठ टुकड़ा खाना जरा मुश्किल होता है ।“   

ढब्बूजी की ख्याति का राज क्या है ? क्यों ढब्बूजी का चुटकला पढकर बूढे भी बच्चे बन जाते हैं ? ऐसी क्या बात है डब्बूजी के हँसगुल्लों में कि मम्मी पापा भी सबकुछ भूलकर उनमें रम जाते हैं ।


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अकबर बादशाह शराब नहीं पीते थे, लेकिन थोड़ी थकान महसूस होने के कारण बादशाह अकबर को बुढापे में शराब का शौक लग गया था । दिन भर तो वे काम काज में लगे रहते थे । रात में अपने नवरत्नों के साथ बात करते समय थोड़ी सी शराब पी लेते थे । यह काम वे छिपकर किया करते थे, फिर भी उनके बात-चित के ढ़ंग से बीरबल को एक दिन इसका पता लग ही गया । इसके बाद बीरबल ने एक दिन उन्हें पीते हुए देख लिया और तभी इस बुरी आदत से बादशाह को छुड़ाने का निश्चय किया ।  जिस कमरे में बादशाह शराब रखते थे, एक दिन बीरबल चुपके से वहां गये और वहां की हर चीज को गौर से देखा । इसके बाद वहां की सभी चीजें तितर-बितर करके शराब की बोतल बगल में दुशाले में ढककर छिपा ली और तेजी से बाहर निकल गया ।----इससे आगे पढने के लिए पुस्तक देखें ।


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इस किताब में सम्मलित तीन कहानियां, असल मे जीवन मे घटित हो रहे कुछ चटक दार, गुदगुदाते किस्सों को इकट्ठा करने की एक कोशिश है। ये कोई नये किस्से नही है, ये हमारे आस पास हो रही आम घटनाक्रम मात्र है, जिसे आपके मनोरंजन के लिये बिखरे हुए हँसी के मोतियों को एक धागे में पिरोके पेश करने को कोशिश की गई है। इसे पढकर देखें आपको जरूर आनंद आएगा । अपने आपको खुश रखना एक कला है, अवसाद से दूर रहने के लिए यह आवश्यक है कि स्वयं को व्यस्त रखें, इन हास्य पुस्तकों को पढते हुए आप जरा भी बोझिल महसूस नहीं करेंगे ।   


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सत्तर-अस्सी के दशक में अशोक चक्रधर का नाम बड़ी तेजी से उभरा और बड़ी जल्दी उन्होंने काव्य-जगत् में अपनी पहचान बना ली तथा मंच की लोकप्रिय कविता के नए मानक तैयार किए। देश-विदेश के हिंदी प्रेमियों के बीच उन्होंने अत्यंत स्नेह और आदर पाया। वे कवियों के कवि हैं।

डॉ. कुँअर बेचैन उनके बारे में कहते हैं—‘‘अशोक चक्रधर ऐसी आँख है; जिससे कुछ छिपता नहीं; ऐसा वृक्ष है; जिसकी छाया में विश्राम और शांति मिलती है; ऐसा दरिया है; जिसकी लहरों पर हम अपने प्रयत्नों और सपनों की नाव सरलता से तैरा सकते हैं; प्रेम का ऐसा बादल है; जो सब पर बरसता है; पसीने की ऐसी चमकदार बूँद है; जो श्रम-देवता के माथे की शोभा बढ़ाती है; ऐसी सुबह है; जिसके पास आकर नींद खुलती है; ऐसी नींद है; जो नए सपने जगाती है और ऐसा फूल है; जो हर पल महकता है; खिलता है और दूसरों के होंठों को अपनी खिलखिलाहट देता है।’’

इस संकलन में उनकी ऐसी प्रतिनिधि कविताएँ संकलित हैं; जिन्होंने कवि सम्मेलनों का मिजाज निर्धारित किया। समय आगे बढ़ता जा रहा है; लेकिन उनकी कविता के कथ्य आज भी प्रासंगिक हैं। 

मजेदार जोक्स इन हिंदी

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